पिता चलाते हैं किराने दुकान, बेटी ने चौथे अटेंप्ट में यूपीएससी किया क्रैक, 255वीं रैंक लाकर बनीं IAS, पति हैं IPS
पिता एक छोटी दुकान चलाते थे और मां गृहणी थी। आर्थिक तंगी और सीमित संसाधन होने के बावजूद दृष्टि ने आईएएस बनने का सपना देखा और कड़ी मेहनत के दम पर इसे साकार भी किया।
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